Nov 30, 2009

हे मानव


हे मानव,
तु कर्मपथ का पंथी बन
हर क्षण चलता रहे
कर्म की बलिवेदी पर
हर क्षण जलता रहे
तू चलता रहे
तेरी मंजिल अभी दूर हैं
तु जलता रहे
तेरा अंत अभी दूर हैं,
अगर मंझिल मिली तो
वहा सुख का साम्राज्य होगा
अगर अंत हुआ तो
हर इंसा' के मस्तक मुह सवार होगा
--मदन 


(मोहनदास करमचंद गाँधी को समर्पित)