Apr 29, 2010

Tum aao

प्रखर ग्रीष्म में घोर आदित्य,
उद्दाम अग्नि बहा रहा |
तुम आओ शशि शीतल 
अब,
अनल अंशुओं में सुधा भरो ||

मैं मिटटी, अधूरी, अधीर,
जलरहित जीती रही |
बरसों, प्रियतम बरसो अब,
मुझ में नवप्राण भरो ||