जाग रे लल्ला, जाग
खोल कर अलसाई अँखिया
देख दिनकर आया हैं आकाश.
सुनहरी धुप आ रही अंगना
चल रही मंद बयार भी.
पंछी बैठे टहनियोपे,
गा रहे उल्लास गीत.
जागना जल्दी से लल्ला ,
भूख लगी होगी तुझे.
मटकी भर लायी औस की,
शक्कर और मीठा दूध भी.
प्रेम उर से उमड़ रहा हैं,
पिले ओकभर इसे भी.
तेरा कंठ मधुर बहुत हैं,
सुना दे, कुछ बोल,
बड़े हो कर मीठे रहना,
पाना विशाल ह्रदय.
सत्य ही मधुर हैं और
सुंदर, विशाल ह्रदय.
एक गुडिया दुकान से लायी,
खेलले जितने आते खेल.
खिलौना हैं यह गुडिया,
पर आदम नहीं खिलौना.
उससे या उसके प्रेमसे न खेलना,
आदम से खेला नहीं जाता.
जाग रे लल्ला, जाग अब
बहोत हुई देर, चाहे जो
इश्वर में मानना, परंतु
समय नहीं इश्वर से कम.
समय का अनादर ना हो,
ये रखना बांध कर गाँठ.
लल्ला जब तु बड़ा होगा,
किताबे पढ़, पाती लिखेगा.
लिखने नया, लिखा मिटाएगा,
किंतु महेनत मत मिटाना,
संघर्ष सच्चा साथी होता हैं.
तुम पाओ या न पाओ ज्ञान,
सदा विद्यार्थी बनना.
विनम्रता आचरण में,
ह्रदय में आशा रखना.
कोई कहे काला तब काला,
सब कहे सफ़ेद तो सफ़ेद नहीं.
आत्मदृष्टी से देखना.
जाग रे लल्ला, जाग
खोल कर अलसाई अँखिया,
देख दिनकर आया हैं आकाश.
गुनगुने पानी से स्नान करवाऊं,
उंगलियोंसे से बाल सवारूँ
में तेरी हूँ तु अकेला नहीं,
तुझे एहसास दिलाऊ|