प्याला दिया पानी का जो उसने,
कोलाहल मच गया,
की पानी इतना खारा कैसे?
पता करवाओ क्या गलत हैं,
तालाब मैं सागर उतरा हैं ,
या नलके मैं नमक हैं?
जाँच हुई की सब सही हैं,
बहोत बारिश हुई थी और
तालाब का पानी सारा सक्कर हैं!
फिर प्याऊ मैं पानी खारा कैसे?
बुझाने प्यास मुसाफिरों की,
मटके भरती थी रोज़ वह लाली,
कन्या के सुनयन द्रवित थे,
बेखुद और यांत्रिक फिर भी,
उमड़ उमड़ कर नैना बरसे.